Sunday, 9 August 2020

detail analysis of new education policy

नई शिक्षा नीति 2020: पीएम मोदी ने बताया, क्यों स्कूलों में 10+2 की जगह लाया जाएगा 5+3+3+4 सिस्टम



पीएम मोदी ने शुक्रवार को बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा व्यवस्था में क्यों 10+2 सिस्टम को खत्म कर 5+3+3+4 सिस्टम को लाया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी की ओर से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो गई है। एक नया ग्लोबल स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। बदलते ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से भारत के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव करने भी बहुत जरूरी है। स्कूल से 10+2 को बदलकर 5+3+3+4 कर देना इसी दिशा में उठाया गया कदम है। हमें अपने स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन बनाना है। हमें इस बात का भी ध्यान रखना है कि वह ग्लोबल स्टूडेंट्स बनने के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। नयी शिक्षा नीति में ऐसा प्रावधान किया गया है कि छात्रों को ग्लोबल सिटीजन बनाने के साथ साथ उनको अपने जड़ों से भी जोड़कर रख जाएगा।

गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब ये 5+ 3+ 3+ 4 के हिसाब से होगा। इसका मतलब है कि प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा। यहां समझें कि क्या है 5+3+3+4 फार्मेट का सिस्टम- 

नई शिक्षा नीति- स्कूल शिक्षा का नया ढांचा, 5+3+3+4 फार्मूला

फाउंडेशन स्टेज
पहले तीन साल बच्चे आंगनबाड़ी में प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे। फिर अगले दो साल कक्षा एक एवं दो में बच्चे स्कूल में पढ़ेंगे। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा। मोटे तौर पर एक्टिविटी आधारित शिक्षण पर ध्यान रहेगा। इसमें तीन से आठ साल तक की आयु के बच्चे कवर होंगे। इस प्रकार पढ़ाई के पहले पांच साल का चरण पूरा होगा।

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प्रीप्रेटरी स्टेज
इस चरण में कक्षा तीन से पांच तक की पढ़ाई होगी। इस दौरान प्रयोगों के जरिए बच्चों को विज्ञान, गणित, कला आदि की पढ़ाई कराई जाएगी। आठ से 11 साल तक की उम्र के बच्चों को इसमें कवर किया जाएगा।

मिडिल स्टेज
इसमें कक्षा 6-8 की कक्षाओं की पढ़ाई होगी तथा 11-14 साल की उम्र के बच्चों को कवर किया जाएगा। इन कक्षाओं में विषय आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। कक्षा छह से ही कौशल विकास कोर्स भी शुरू हो जाएंगे।

सेकेंडरी स्टेज
कक्षा नौ से 12 की पढ़ाई दो चरणों में होगी जिसमें विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा। विषयों को चुनने की आजादी भी होगी।

 

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पहले यह थी व्यवस्था
पहले सरकारी स्कूलों में प्री-स्कूलिंग नहीं थी। कक्षा एक से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी। कक्षा 11 से विषय चुन सकते थे।

नई शिक्षा नीति पर पीएम मोदी के भाषण की अन्य अहम बातें

पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की और नए भारत की नींव तैयार करने वाली है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतुष्टि जताई की देश के किसी भी क्षेत्र या वर्ग से भेदभाव संबंधी कोई शिकायत नहीं आई। उन्होंने कहा, ''हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपने राष्ट्रीय मूल्यों के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय ध्येय के अनुसार सुधार करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश की शिक्षा प्रणाली अपनी वर्तमान औऱ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तैयार रखे और तैयार करे।''

उन्होंने कहा, ''भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत का और नए भारत की नींव तैयार करने वाली है।''

मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आज देश भर में व्यापक चर्चा हो रही है। अलग-अलग क्षेत्र के लोग, अलग-अलग विचारधाराओं के लोग, अपने विचार प्रकट कर रहे हैं और इसकी समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये एक स्वस्थ चर्चा है, ये जितनी ज्यादा होगी, उतना ही लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा।
    
उन्होंने कहा, ''ये खुशी की बात है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का भेदभाव है, या किसी एक ओर झुकी हुई है। यह संकेत है कि लोग वर्षों से चली आ रही शिक्षा प्रणाली में बदलाव चाहते थे।''
     
प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी तक जो हमारी शिक्षा व्यवस्था है, उसमें ''क्या सोचना है पर ध्यान केंद्रित रहा है जबकि इस शिक्षा नीति में ''कैसे सोचना है पर बल दिया जा रहा है।
    
इस सम्‍मेलन का आयोजन मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा किया जा रहा है।
    
सम्‍मेलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत शामिल शिक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे कि समग्र, बहु-विषयक एवं भविष्य की शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, और शिक्षा में बेहतर पहुंच के लिए प्रौद्योगिकी के समान उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
    
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल और केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे के अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ-साथ प्रख्यात शिक्षाविद् व वैज्ञानिक भी इस कार्याक्रम में शिरकत कर रहे हैं।
    
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी प्रदान की थी। नई शिक्षा नीति ने 34 साल पुरानी शिक्षा नीति को बदला है, जिसे 1986 में लागू किया गया था। नई नीति का लक्ष्य भारत के स्कूलों और उच्च शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सुधार करना है कि भारत दुनिया में ज्ञान का 'सुपरपॉवर कहलाए।

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अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के बाद क्या सरकार एनआरसी, जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी काम कर रही है?

नई दिल्ली: अयोध्या (Ayodhya) में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के बाद क्या मोदी सरकार (Modi Govt) एनआरसी (NRC), जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Act) पर भी काम कर रही है? क्या संसद के आने वाले सत्र में जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार कोई बिल ला सकती है. क्या तैयारी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) की भी है. ये सवाल इसलिए खड़े हुए हैं क्योंकि बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर जनसंख्या नियंत्रण के लिए संसद में बिल लाने की मांग की है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वो देशवासियों को जनसंख्या नियंत्रण के बारे में अवगत कराएं. साथ ही राष्ट्रहित में आगामी संसद सत्र में जनसंख्या नियंत्रण विधेयक पास करें. 

सूचना प्रौद्योगिकी मामलों की स्थायी समिति, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय सलाहकार समिति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. अग्रवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, "आपने 15 अगस्त 2019 के अवसर पर देश में जनसंख्या नियंत्रण की जो जरूरत बताई थी, अब उस संकल्प को पूरा करने का समय आ गया है." उन्होंने कहा, "मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप आगामी संसद सत्र में इस संबंध में उचित विधेयक लाने पर विचार करें."  

ये लिखा है चिट्ठी में: 
"आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सभी भारतीयों और दुनियाभर के हिंदुओं की तरफ से मैं धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि 500 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद आस्था और उम्मीद की नई सुबह हुई है. हिंदू दर्शन के अनुसार दुनिया में हर चीज ईश्वर की मर्जी से ही होती है और ईश्वर अपने कार्यों को पूरा कराने  के लिए व्यक्तियों को चुनता है. ईश्वर ने आपको 130 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए चुना है. 15 अगस्त 2019 को आपने देश को जनसंख्या नियंत्रण कानून के उपायों के लेकर आश्वस्त किया था. अब वक्त आ गया है कि अब वक्त आ गया है उस शपथ को पूरा करने का. इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि संसद के आने वाले सत्र में इस विषय पर उपयुक्त बिल लाया जाए."  
 दरअसल, 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण में जनसंख्या विस्फोट पर चिंता जताई थी. पीएम मोदी ने कहा था, "भारत परिवार नियोजन अपनाने वाला दुनिया का पहला देश था. 1949 में पारिवारिक नियोजन कार्यक्रम का गठन किया गया था. 1952 में पहला परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया गया था. 1977 में सरकार ने एक नई जनसंख्या नीति का गठन किया था. लोगों को स्वेच्छा से स्वीकार करने का विकल्प दिया गया था. 2024-25 तक भारत, चीन को आबादी के मामले में पीछे छोड़ देगा. भारत की जनसख्या 135 करोड़ है, चीन की 142 करोड़ है. जनसख्या के मामले में भारत कुछ वर्षों में चीन को पीछे छोड़ देगा." 

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई बार हुईं कोशिशें
जब इस जनसंख्या कानून को लेकर बहस छिड़ती है तो विपक्ष उसे वोटबैंक की सियासत की तरफ मोड़कर सरकार के खिलाफ प्रहार करता रहा है. जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई बार कोशिशें हुई हैं. नवंबर 2019 में लोकसभा में बीजेपी सांसद अजय भट्ट ने ‘छोटे परिवार को अपनाकर जनसंख्या नियंत्रण’ बिल का प्रस्ताव रखा था. 2018 में बीजेपी और टीडीपी के करीब 125 सांसदों ने राष्ट्रपति से भारत में दो बच्चों की नीति लागू करने का आग्रह किया था. 
दिसंबर 2018- बीजेपी सांसद प्रहलाद पटेल और संजीव बालियान सहित अलग अलग दलों के सांसदों ने जनसंख्या नियंत्रण के लिये सख्त कानून की पैरवी की थी. सवाल यही है कि क्या संसद के आने वाले सत्र में अबकी बार सरकार और विपक्ष के बीच जनसंख्या पर आर पार होने जा रहा है. 

जनसंख्या पर नियंत्रण होता तो देश आज कहां होता?
1. भारत दुनिया के टॉप 3 आर्थिक शक्ति में से एक होता. 
2. साक्षरता दर 74.04 % की बजाय 100 प्रतिशत होती. 
3. गरीबी रेखा से नीचे करीब 22 प्रतिशत आबादी नहीं होती. 
4. जनसंख्या घनत्व 416 प्रति वर्ग किलोमीटर नहीं होता. 
5. विकास दर 10 प्रतिशत से ऊपर होती. 

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